Shimla News: शिमला में बागवानों की निगाहें आसमान पर टिकी हैं, फलों की चिलिंग प्रक्रिया अभी तक शुरू नहीं हुई है। इस दौरान बागवानों को आकाशीय पानी की प्रतीक्षा है। विशेषज्ञों का मानना है कि पौधों में चिलिंग प्रक्रिया के लिए औसत तापमान सात डिग्री सेल्सियस से कम होना चाहिए। इससे पौधों का चिलिंग प्रक्रिया शुरू होगा। बागवानों को अभी तक आसमानी वर्षा और बर्फबारी का इंतजार है। टिकी हुई निगाहों के बावजूद, यह चिलिंग प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई है जिसकी वजह से बागों का ध्यान बर्फबारी और वर्षा की अभाव में रहा है।

अर्ली वैराइटी के पौधों के लिए 600 से 800 चिलिंग ऑवर का होना जरूरी

बागवानी विशेषज्ञ डॉ. एसपी भारद्वाज के अनुसार, चिलिंग प्रक्रिया शुरू होने पर पौधा सुप्तावस्था में चला जाता है, जो उचित विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने बताया कि सेब की रॉयल किस्म के लिए 800 से एक हजार चिलिंग ओवर की आवश्यकता होती है, जबकि अर्ली वैराइटी के पौधों के लिए 600 से 800 चिलिंग ओवर की जरूरत होती है।

 

 

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